बैरोमीटर अथवा वायुदाब मापक यंत्र का उपयोग।खोजकर्ता ।कार्यप्रणाली ।प्रकार।

बैरोमीटर यंत्र की परिभाषा उपयाेेग एवं उसके प्रकार

वायुदाबमापी  अथवा बैरोमीटर

बैरोमीटर का प्रयोग वायुमण्‍डलीय दाब को मापने के लिये किया जाता है ।

प्रथ्‍वी को चारो ओर से घेरे हुये आवरण को वायुमण्‍डल  कहते  है । जैसा कि हम सभी जानते है कि वायुमण्‍डल का घनत्‍व सभी जगह एक सा नही  होता कही यह कम होता है तो कही वायुमण्‍डल का घनत्‍व ज्‍यादा रहता है । समुद्रतल पर वायु का दबाव 760 मिलीमीटर पारे के स्‍तंभ के दाब के बराबर होता है उपर जाने पर वायुमण्‍डलीय दाब मे कमी हेाती जाती है ताप तथा स्‍थान के परिवर्तन करने पर वायुमण्‍डलीय दबाव मे भी परिवर्तन हो जाता है । वायु के दबाव के कारण वायुमण्‍डलीय दाब लगता है उचाई के बढने के साथ वायुमण्‍डलीय दाब का मान कम होता जाता है ।

वायु केे इस दाब  को मापने के लिये हमे जिस यंत्र की आवश्‍यकता होती है उसे वायुदाबमापी अथवा बैरोमीटर कहा जाता है ।

बैरोमीटर का आविष्‍कार

बैरोमीटर की खोज इटली के महान वैज्ञानिक इवानगैलिस्‍टा टोरिसेली ने सन् 1643 मे की थी ।

बैरोमीटर का सिद्धांत

बैरोमीटर के द्वारा वायुमण्‍डलीय दाब का मापन करने के लिये बैरोमीटर मे हवा ,पानी अथवा पारे का प्रयोग किया जाता है ।साधारण बैरोमीटर  मे कॉंच की एक नली होती है जिसका एक सिरा बंद तथा दूसरा सिरा खुला रहता है ।एक अन्‍य पात्र लेते है जिसमे कुछ उँचाई तक  पारा भरा जाता है ,कॉच की इस नली को पात्र मे उल्‍टा करके रख दिया जाता है जिससे खुला सिरा पात्र मे पारे की सतह के संपर्क मे आये । इस प्रकार रखने से नली मे पारे के स्‍तर मे कुछ कमी आती है और वह नीचे गिरने लगता है तथा एक निश्चित उँचाई पर आकर रूक जाता है । पात्र के तल से नली मे पारे के तल तक की उँचाई तक पारे का जो दाब हेाता है वह वायुमण्‍डलीय  दाब के बराबर होता है ।

बैरोमीटर के प्रकार

  1. फोर्टिन बैरोमीटर
  2. टोरिसिली बैरोमीटर
  3. धातु बैरोमीटर
  4. ऐनेरोइड बैरोमीटर
  5. डिजिटल बैरोमीटर

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