ठोसों में दोष | बिंदु ,शॉट्की ,फ्रेंकल दोष,रिक्त,अंतराली | रसायन विज्ञान

ठोस अवस्था रसायन विज्ञान के कक्षा 12वीं का पहला पाठ है इस पेज पर हम ठोसो में पाए जाने वाले दोष जैसे बिंदु दोष, इलेक्ट्रॉनिक दोष एवं उनके प्रकार रससमीकरणमितीय दोष ,अ रससमीकरणमितीय दोष, रिक्त दोष, अंतराली दोष,शाटकी दोष,फ्रेंकल दोष,अशुध्धि दोष आदि को समझेंगें

ठोस अवस्था जिसमें क्रिस्टलीय ठोसो में दोष होते हैं या जब क्रिस्टल के मूल कण अव्यवस्थित रहते हैं जैसे किसी जगह मूल कण नही है या एक्स्ट्रा है इत्यादि डिफेक्ट है तब उसे दोष कहते हैं

ठोसो में दोष या अपूर्णता है। defects in solid

जब किसी पदार्थ सभी मूल कण अव्यवस्थित रहते हैं तब उसे अक्रिस्टलीय ठोस कहते हैं परंतु सारे मूल कण व्यवस्थित है और कुछ कण अव्यवस्थित रहते हैं तब उसे क्रिस्टलीय ठोस में दोष कहते हैं

ठोसो में दोष के प्रकार

दोष ,अपूर्णता या त्रुटि दो प्रकार की होती है

  • बिंदु दोष
  • इलेक्ट्रॉनिक दोष

बिंदु दोष के प्रकार । Point Defect

जब किसी क्रिस्टल में मूल कण या आयन या परमाणु अपनी जगह से दूसरी जगह चला जाता है तब यह बिंदु दोष उत्पन्न होता है इसे जालक दोष भी कहा जाता है

बिंदु दोष के भी अलग-अलग प्रकार होते हैं जिसमें रससमीकरण में दिए एवं अ रसमीकरणमितीय में दिए अशुद्धि दोष

1.रससमीकरणमितीय दोष

रससमीकरणमितीय दोष एक ऐसा बिंदु दोष है जिसमे योगिक के सूत्र में कोई परिवर्तन नही आता है

या जब किसी क्रिस्टल में बिंदु दोष होने पर भी उसके सूत्र में कोई परिवर्तन नही आता ऐसे बिंदु दोष को रससमीकरणमितीय दोष कहते है

रससमीकरणमितीय को उष्मागतिकी दोष भी कहते है

रससमीकरणमितीय दोष भी अलग अलग प्रकार के होते है जैसे रिक्त दोष,अन्तराली दोष,शॉट्की दोष, फ्रेंकल दोष

रिक्त दोष

जब किसी क्रिस्टलीय ठोस या क्रिस्टल में किसी जगह उसके मूल कणों होते ही नहीं है या स्थान रिक्त रहता है तो उसे रिक्त दोष कहते हैं

पदार्थ को गर्म करने पर रिक्त दोष पैदा हो सकता है और फिर उसके घनत्व में कमी भी आ जाती है

अन्तराली दोष

जब किसी क्रिस्टल की पूरी पैकिंग सही है और किसी जगह एक्स्ट्रा मूलकण है तब उसे अन्तराली दोष कहते है

अन्तराली दोष से पदार्थ का घनत्व बढ़ जाता है

शॉट्की दोष

आयनिक ठोसों में जब कोई आयन का युग्म या एक धनायन और एक ऋणायन नही होते तब ऐसे दोष को शॉट्की दोष कहते है ये निकल जाते है और उस जगह खाली स्थान छोड़ जाते है यानी रिक्ति बनाते है

शॉट्की दोष में क्रिस्टल उदासीन रहता है क्योंकि बराबर संख्या में धन और ऋण आयन निकल जाते है

इस दोष होने के बाद ठोस का घनत्व घट जाता है

शॉट्की दोष के उदाहरण है NaCl, KCl,CsCl,CsBr

फ्रेंकल दोष

जब किसी आयनिक ठोस में कोई आयन यानी मूल कण अपनी जगह से हटकर रिक्त स्थान में जगह लेते है तब उसे फ्रेंकल दोष कहते है

मूल कण या आयन अपनी जगह से हट कर दूसरी जगह चले जाते है शॉट्की दोष की तरह लुप्त नही होते इसलिये ठोस का घनत्व स्थिर ही रहता है

फ्रेंकल दोष के उदाहरण- ZnS, AgCl, AgBr, Agl है

2.अ-रससमीकरणमितीय दोष

जब किसी ठोस में ऐसा बिंदु दोष पाया जाता है जिसके कारण उस ठोस का योगिक सूत्र परिवर्तित हो जाता है या उस योगिक के धनायन और ऋण आयन बढ़ जाते हैं या धातु आयन अतिरिक्त आ जातें हैं तब ऐसे दोष को अ-रससमीकरणमितीय कहते है

ये दो प्रकार का होता है

धातु न्यूनता दोष

जब किसी ठोस में धनायन अपेक्षा से कम होते है तब उसे धातु न्यूनता दोष कहते है

धातु अधिकता दोष

जब किसी ठोस में धनायन अपेक्षा से अधिक होते है तब उसे धातु अधिकता दोष या आधिक्य दोष कहते है

3.अशुद्धि दोष

जब किसी आयनिक ठोस के मूल कण यानी धनायन की जगह कुछ अन्य धनायन आ जाते है और मूल कणों को प्रतिस्थापित कर देते है तब ऐसे में अशुद्धि पैदा हो जाती है इसे अशुद्धि दोष कहते है

उदाहरण के लिए यदि CdCl2 और AgCl का ठोस विलयन है

आशा है बिंदु दोष,शॉट्की ,फ्रेंकल दोष,रिक्त दोष, इत्यादि आपको समझ आ गए होंगें रसायन विज्ञान ठोस अवस्था कक्षा 12  का यह टॉपिक था इसे शेयर कीजिये अपने दोस्तों से और कोई प्रश्न हो तो कमेंट कीजिये

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